Monday, 25 February 2013

कोहरे की चादर......


कुत्ते कोने में छुप बैठे, घूमें न भईया
घर आंगन मुंडेर दिखाई दे, न गौरैया।

पानी छूने में जो डरता, कौन नहाएगा,
ठंड बाबरी से अब पंजा कौन लड़ाएगा

गमले के पौधे में, सिकुड़े, गिरगिट,गिरगिट्टी,
हाल हुआ बेहाल, गुम हुई है सिट्टी-पिट्टी।

मूंगफली बादाम ठंड की, उसको खाते है,
कड़क स्वाद की चाय बनाकर हम पी जाते है।

चिंटू, सिंटी, गौरव, गीता,राजू और राधा,
मुश्किल है कैसे मिल पाए, सर्दी है बाधा।

दिन में भी बिस्तर में दुबके निकले न बाहर,
सर्दी ने पहना दी दिन को कोहरे की चादर।