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Friday, 8 March 2019

मन की आँखों वाले

मन की आँखों वाले
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आओ खेलें खेल निराले,
दूर हटाएं मन के जाले,
पीड़ा महसूसें हम उनकी,
जो हैं मन की आँखों वाले,
किसी वजह से हाथ न जिनके,
पैर नहीं या आँख न जिनके,
उन पर हँसें नहीं, ये सोचें,
अगर कहीं हम ऐसे होते,
कोई हँसता कैसा लगता,
मन में जलता तीर सा लगता,
उसकी पीड़ा को अपना लें,
आओ खेलें खेल निराले,

Saturday, 9 February 2019

बैठ गरुण के पंखों पर

बैठ गरुण के पंखों पर हम,
आसमान से कर लें बातें,
चंदा के घर नाचें गाएँ,
हो जब पूरनमासी रातें,
मोद मनाएं मंगल पर और,
शनि के वलय संग हम घूमें,
वृहस्पति पर क्रिकेट खेलें,
और मित्रों संग प्लूटो पर झूमें,
संग मछलियों के तैरेंगे,
सागर के तल में हम जाकर,
परियों की जादू वाली जो,
छड़ी हमें कोई दे दे,लाकर

Saturday, 23 December 2017

हम दीवाने जरा अलग

मनचाहा मिल सका नहीं ग़र,
सबके बहाने अलग-अलग थे,

उम्र - उम्र की बातें होती,
सबके खजाने अलग-अलग थे,

तुमने प्यार के पैसे माँगे,
मैंने दिल से बदला दिल को,

तुम तो निकले बड़े सयाने,
हम दीवाने जरा अलग थे,

हम कितने लायक हैं

आज घूमने गए सभी हम
छोड़ के अपनी बस्ती,
पैसे खर्चो नहीं मिलेगी
मिली ये खुशियाँ सस्ती,
छोड़ किताबों की बंदिश से,
देखी बाहर दुनिया,
आई जो फुर्ती चुस्ती तो,
बस में कर ली मस्ती,
इस मस्ती में झूम रहे,
हम कितने लायक हैं

जीवन में एक मित्र बनाएं

सोते हैं तो अब जग जाएं,
धरती को कपड़े पहनाएं,
आओ आगे बढ़कर आएं,
जीवन में एक मित्र बनाएं,
प्रतिपल मदद हमारी करते,
गर्मी में आतप को हरते,
फूल औ फल पत्तियाँ दवाएं,
देते शीतल मंद हवाएं,
पानी देकर बड़ा बनाएं,
जीवन में एक मित्र बनाएं
पल-पल बदलें,कल अलग
और आज अलग,
हर साजिंदा लिए हुए है,
साज अलग,
क्यों ना बदलें हम ऐसे में,
रंग अपने,
होती अलग जगह,
होते अंदाज़ अलग,
झुंड में हैं ये बच्चे,
अथवा फूलों का गुलदस्ता,
साथ में हों जब इनके
तो लगता हमको अच्छा,
इस जहान में हैं जितने,
वे सब दुखदर्द भुलाकर,
बच्चों के संग में ये मन भी
हो जाता है बच्चा,
आओ आज करे सब मिलकर,
चिड़ियाघर की सैर,
देखें समझें पशु पक्षी को,
हल्ला किए वगैर,
एक सींग का गैंडा देखो,
जिसकी मोटी खाल,
पानी के राजा लेटे हैं,
मगरमच्छ घड़ियाल,
सुंदर मोर देखते जाओ,
तोता हरियल वाला,
भाग न पिंजरे से जाए,
सो लगा हुआ है ताला,
हाथी शेर जिराफ लकड़बग्घे,
कंगारू भालू,
प्यारा पांडा चढ़ा पेड़ पर,
खाता देखो आलू,
देख न पाओ एक बार में,
फिर आ जाना खैर,
आओ आज करे सब मिलकर,
चिड़ियाघर की सैर,
कागज के थैले अपनाओ,
पर्यावरण को स्वच्छ बनाओ,
अगर गंदगी हो तो उसको,
कूड़ेदानों में पहुँचाओ,
देश हमारा है घर जैसा,
इसको साफ रखो रखवाओ,
हम जैसे करते हैं देखो,
तुम भी निकलो आगे आओ,
एक से एक जुडे़ं तो मिलकर,
दरिया बन एक लहर उठाओ,
देश हमारा सबसे न्यारा,
बढ़ो, इसे आगे बढ़वाओ,
कोई बोले कोमल हमको,
कोई कहे कठोर,
हिम्मत नहीं बपौती कोई,
इस पर सबका जोर,
बनें साहसी वीर बहादुर,
हो जाएं सिरमौर,
करें इरादा बनें,
रहें हम आखिर क्यों कमजोर,

Saturday, 14 October 2017

पुरानी है हवेली पर चमक,
इसकी अनूठी है,
नगीना है ये गौरव देश का,
जैसे अगूंठी है,
अपना रावण मारें
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चुन्नू गया दशहरा मेला,
रावण फूँका गया वहाँ पर, 


चुन्नू कहे-बताओ पापा,
क्यों हर साल जलाते रावण, 


पापा बोले-चुन्नू तुमको,
क्यों ये बात समझ ना आई,

नाम सिर्फ पुतले का रावण,
खड़ी सामने यहाँ बुराई,

कहना है बस सबसे इतना,
अपने को हम आप सँवारें,

देख बुराई अपने अंदर,
हम अपने रावण को मारें,
चेहरों पे लगे चेहरे,
हमको ये बताते हैं,
हम दोस्त रहें मिलकर,
चेहरे खो जाते हैं,
दिल में तो एक जैसे,
अरमान मचलते हैं,
चेहरे तो झूठे हैं,
चेहरे तो बदलते हैं,
कहती हैं वीरान दिवारें मुझको भी पहचान,
आज दिख रही ऐसी,कल तक थी मेरी भी शान,
नज़र फेरकर यूँ मत जाओ, बैठो पास हमारे,
देखो कितना बड़ा खज़ाना अंदर मेरे छिपा रे,
रंग-रंगीले कपड़े पहने मैं जहाज रेगिस्तानी,
क्या-क्या मेरी विशेषताएँ क्या तुमने हैं वे जानी,
करें सवारी बैठें ऊपर कोई, राजा या रानी,
एक बार में पी लेता हूँ मैं हफ्ते भर का पानी,
दूर-दूर तक पानी जिसमें,
कमल खिल रहे प्यारे,
बीच ताल जलमहल बना है,
यहाँ घूमने आ रे,
जगह सलूम्बर जिला उदयपुर-
का सेरिंग तालाब,
कैसा लगा देखकर तुमको,
कहिए जरा जनाब,
नीलकण्ठ ट्रेकिंग अभियान
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यह पहला विश्राम ,
यहाँ से ऊपर चढ़ना होगा,
ऊँचे-नीचे राहों में,
संग-संग ही बढ़ना होगा,
हैं बन्दर लंगूर,
घास मत छूना,बिच्छू वाली,
जीव-जन्तु फल-फूल,
देखना मनमोहक हरियाली,
नीलकण्ठ ट्रेकिंग अभियान
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ले नीबू का पानी
या फिर चाय ले ले,
जरा धूप ले या
कहीं छाँव ले ले,
जो बारिश की बूँदें
पडें तेरे ऊपर,
लगा छाता पत्थर का,
आराम ले ले,
नीलकण्ठ ट्रेकिंग अभियान
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चेहरों पे खुशी छा जाती है,
आँखों में भी नूर आ जाता है,
कुदरत के करीब आ, तन मन में,
मस्ती का सुरूर आ जाता है,
बहते हुए ये झरने,
मनमोहती हरियाली,
होली है ईद है ये,
ये दशहरा दीवाली,
खुश कर रहे ये मन को,
ग़म दूर भागते हैं,
पाते वे ऐसे लम्हे,
जिनके भाग्य जागते हैं,