कहती हैं वीरान दिवारें मुझको भी पहचान,
आज दिख रही ऐसी,कल तक थी मेरी भी शान,
नज़र फेरकर यूँ मत जाओ, बैठो पास हमारे,
देखो कितना बड़ा खज़ाना अंदर मेरे छिपा रे,
आज दिख रही ऐसी,कल तक थी मेरी भी शान,
नज़र फेरकर यूँ मत जाओ, बैठो पास हमारे,
देखो कितना बड़ा खज़ाना अंदर मेरे छिपा रे,
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