Saturday, 14 October 2017

आस का विश्वास का आया सवेरा,
जो करेगा दूर जीवन का अँधेरा,

इक नए उत्साह का सूरज उगा है,
चल पड़ेगा रथ बहुत दिन से रुका है,

क्षितिज के द्वारे से झुककर झाँकती किरनें,
रंग बिखराकर हमारा मन लगी हरने,

जाग जाएं जब तभी समझो सवेरा,
ग़म न कर ग़र राह में है तम घनेेरा,

चल रहा जीवन हमारा, चल रहे हम,
रुक गए ये कारवाँ सब, जाएगा थम,

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