Saturday, 14 October 2017

ख़्वाब आँखों में, मैं पाँवों में सफ़र रखता हूँ
रेत पर लेट के तारों पे नज़र रखता हूँ

धूल हालात को हर बार चटाई मैंने
मैं मुक़द्दर तो नहीं रखता जिगर रखता हूँ

मेरी मंजि़ल को मेरी कितनी तलब है देखो
राह बन जाती है, मैं पांव जिधर रखता हूँ

चाँद तारों से उजालों से मुझे क्या लेना
मैं तो जुगनू हूँ अंधेरों की ख़बर रखता हूँ

हरमन दिनेश

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