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Saturday, 14 October 2017

चाँद हो सामने,
तारों की जरूरत क्या है,
तुम नज़र में हो,
नज़ारों की जरूरत क्या है,
यूँ तो दुनिया में,
बहुत से हैे मेरी राम सलाम,
दोस्त तुम सा हो,
हजारों की जरूरत क्या है,
फिर कहाँ मंज़िलों से दूरी है,
काम कुछ हो,ज़ुनू जरूरी है,
एक से कोई दूसरा,
करता नहीं क्यों बातचीत,
एक सन्नाटा कि जैसे,
बिखरा हुआ महफिल में है,
वक्त आने दे बता देंगे,
ऐ अय जंगल तुझे ,
हम अभी से क्या बताएँ,
क्या हमारे दिल में है?

Saturday, 23 April 2016

अभी-अभी तो शुरूआत है,
आग कलेजे में भर ली,
कर डाली पूरी हर इच्छा,
जो इच्छा मन में कर ली,
पता नहीं कितनी हिम्मत का,
भरा खज़ाना है तन में,
मन में सोचा,जान लगा दी,
मंज़िल कदमों में धर ली

Sunday, 3 April 2016

हो सके तो हुजूर,
ये गुरूर कम कर दो,
बीज की तरह अहम,
जमीं में दफ़न कर दो
कोई कभी भी कहीं,
दु:ख में दिखे तुमको,
सुकूँ मिलेगा दिल को,
उसका दर्द कम कर दो,

Monday, 25 November 2013

आना है तो आ राह में कुछ देर नहीं है,
भगवान के घर देर है अंधेर नहीं है,

जब तुझसे न सुलझे तेरे उलझे हुए धंधे,
भगवान के इंसाफ पे सब छोड़ दे बंदे

खुद ही तेरी मुशकिल को वो आसान करेगा,
जो तू नहीं कर पाया वो भगवान करेगा,

आना है तो आ राह में कुछ देर नहीं है,
भगवान के घर देर है अंधेर नहीं है,

कहने की ज़रूरत नहीं आना ही बहुत है,
इस दर पे तेरा शीश झुकाना ही बहुत है,

जो कुछ तेरे दिल में है सब उसको ख़बर है,
बंदे तेरे हर हाल पे मालिक की नज़र है,

आना है तो आ राह में कुछ देर नहीं है,
भगवान के घर देर है अंधेर नहीं है,

बिन माँगे ही मिलती हैं यहाँ मन की मुरादें,
दिल साफ हो जिनका वो यहाँ आके सदा दें,

मिलता है जहाँ न्याय वो दरबार यही है,
संसार की सबसे बड़ी सरकार यही है,

आना है तो आ राह में कुछ देर नहीं है,
भगवान के घर देर है अंधेर नहीं है,

Friday, 8 November 2013

हो के मायूस तेरे दर से सवाली न गया,
झोलियाँ भर गईं सबकी,कोई खाली न गया,

तेरे दरबार में जो भी, परेशां हो के आए,
दुआएँ दे के जाए और मुरादें ले के जाए,

तू रहमत का फरिश्ता है,तू उजड़े घर बसाए,
तू रूहों का मसीहा है, तू हर ग़म को मिटाए,

अहले-दिल अहले-मोहब्बत पे इनायत है तेरी,
तूने डूबों को उबारा है, ये शोहरत है तेरी,

अनोखी शान तेरी, निराली आन तेरी,
तू मस्ती का खज़ाना,तेरा हर दिल दीवाना,

तू महबूबे-ख़ुदा है, तू हर ग़म की दवा है,
तभी तो सब कहते है,कहते है,कहते है,

हो के मायूस तेरे दर से, सवाली न गया,
झोलियाँ भर गईं सबकी,कोई खाली न गया,

जमाले-यार देखा है,जमाले-यार देखा,
रुखे-दिलदार देखा है,रुखे-दिलदार देखा,

किसी का नाज़नी जलबा सरे-दरबार देखा,
तमन्नाओं के सहरा में, हसीं-गुलजार देखा,

जब से देखा है तुझे,दिल का अजब आलम है,
जानो-ईमा भी अगर नज़र करूँ, तो कम है,

था जो सुनने में आया, तुझे वैसा ही पाया,
तू अरमानों का साहिल,तू उम्मीदों की मंज़िल,

तू हर बिगड़ी बनाए, तू बिछड़ों को मिलाए,
तभी तो सब कहते हैं,कहते हैं,कहते हैं,

हो के मायूस तेरे दर से, सवाली न गया,
झोलियाँ भर गईं सबकी,कोई खाली न गया
तोरा मनवा क्यों घबराए रे,
लाखों दीन दुखियारे प्रानी,जग में मुक्ति पाएँ रे,
राम जी के द्वार रे,

बन्द हुआ ये द्वार कभी ना,
जुग कितने ही-2 बीते,
सब द्वारों पर हारने वाले,
इस द्वारे पर-2 जीते,
लाखों पतित लाखों पतिताएँ,
पावन होकर आए रे,
रामजी के द्वार से,

तोरा मनवा क्यों घबराए रे,
लाखों दीन दुखियारे प्रानी,जग में मुक्ति पाएँ रे,
राम जी के द्वार रे,

हम मूरख जो काज बिगारें,
राम वे काज सँवारें,
वो महानंदा हो कि अहल्या,
सबको पार उतारें,
जो कंकर चरनों को छूले-2,
वो हीरा हो जाए रे,
राम जी के द्वार से,

तोरा मनवा क्यों घबराए रे,
लाखों दीन दुखियारे प्रानी,जग में मुक्ति पाएँ रे,
राम जी के द्वार रे,
तेरी है जमीं तेरा आसमाँ,तू बड़ा मेहरबाँ,तू बख्शीश कर,
सभी का है तू सभी तेरे, खुदा मेरे तू बख्शीश कर,

तेरी मर्जी पे ऐ मालिक, हम इस दुनिया में आए हैं,
तेरी रहमत से हम सबने, ये जिस्म और जान पाए हैं,

तू अपनी नज़र हम पर रखना, किस हाल में हैं ये खबर रखना,
तेरी है जमीं तेरा आसमाँ, तू बड़ा मेहरबाँ,तू बख्शीश कर,

तू चाहे तो हमें रक्खे, तू चाहे तो हमें मारे,
तेरे आगे झुका के सर ,खड़े हैं आज हम सारे,

सबसे बड़ी ताकत वाले, तू चाहे तो हर आफत टाले,
तेरी है जमीं तेरा आसमाँ,तू बड़ा मेहरबाँ,तू बख्शीश कर,
तोरा मन दरपन कहलाए,
भले बुरे सारे कर्मो को,
देखे और दिखाए,
तोरा मन दरपन कहलाए,

मन ही देवता मन ही ईश्वर,
मन से बड़ा न कोए,
मन उजियारा जब-जब फैले,
जग उजियारा होए,
इस उजले दरपन पर प्रानी,
धूल न जमने पाए,
तोरा मन दरपन कहलाए,

सुख का कलियाँ,दुख के काँटे,
मन सबका आधार,
मन से कोई बात छुपे ना,
मन के नैन हजार,
जग से कोई भाग ले चाहे,
मन से भाग न पाए,
तोरा मन दरपन कहलाए,

तन की दौलत,ढ़लती छाया,
मन का धन अनमोल,
तन के कारण मन को अपने,
मत माटी में रोल,
मन की कदर भलाने वाला,
हीरा जनम गँवाए,
तोरा मन दरपन कहलाए,

(साहिर)
हम हैं तेरी संतान,
ये प्राण तेरी देन हैं ये देह तेरा दान,
अल्लाह कहे कोई तुझे या कोई कहे भगवान,
हम हैं तेरी संतान,

जीवन में हर एक मोड़ पे ठोकर से बचाना,
भटकें तो हमें हाथ पकड़ राह पे लाना,
हम जो भी हैं बस इतना रहे ध्यान,
हम हैं तेरी संतान,

दुनियाँ में कभी झूठ के आगे न झुकें हम,
सच बात के ऐलान पे रोके न रुकें हम,
मिल जाय तेरे द्वार से हम सबको ये वरदान,
हम हैं तेरी संतान,

हम देश की धरती पे नए फूल खिलाएँ,
पुरखों से जो पाई वो कला आगे बढ़ाएँ,
हमसे हो नए युग के नए ज्ञान की पहचान,
हम हैं तेरी संतान,

इन्सान की सेवा हो सदा काम हमारा,
इस काम से संसार में हो नाम हमारा,
इस देश का इतिहास सदा हम पे करे मान,
हम हैं तेरी संतान,
अल्ला तेरो नाम,ईश्वर तेरो नाम,
सबको सम्मति दे भगवान,

इस धरती का रूप न उजड़े,
प्यार की ठन्डी धूप न उजड़े,
सबको मिले सुख का वरदान,

अल्ला तेरो नाम,ईश्वर तेरो नाम,
सबको सम्मति दे भगवान,

माँगों का सिन्दूर न छूटे,
माँ-बहनों की आ न टूटे,
देह बिना न भटकें प्रान,

अल्ला तेरो नाम,ईश्वर तेरो नाम,
सबको सम्मति दे भगवान,

ओ सारे जग के रखवाले,
निर्बल को बल देने वाले,
बलवानों को दे दे ज्ञान,

अल्ला तेरो नाम,ईश्वर तेरो नाम,
सबको सम्मति दे भगवान,

Sunday, 15 September 2013


आज प्रबल आवश्यकता है जन-जन के आह्वान की,
मन की लिप्सा लोभ त्यागने को जड़ता अभिमान की,
रह सके खामोश जुबाँ, जिन हालातों को देख कभी,
हमें बदलने हैं अपनी खोटी किस्मत के लेख सभी,

बढ़ो कि देखो तुमको खुद मंज़िल न आज पुकारा,
उठो जवानों आज वतन की माटी ने ललकारा,

आज द्रोह की ही संस्कृति की हवा बह रही है हर ओर,
बुद्धिमान संत्रस्त दिख रहे राजा बने हुए है चोर,
काश कहीं से धुँआ उठे अंगार बने एक आग जले,
एक एक दो ग्यारह होकर मिलें राह में साथ चलें,

तिरछी भ्रकुटि आज मानवता की, कर रही इशारा,
उठो जवानों आज वतन की माटी ने ललकारा,

उठो अहिंसा की संस्कृति पर हिंसा के आघात हो रहे,
स्वच्छ रुपहली इस धरती पर भीषण उल्कापात हो रहे,
कहीं न बदले मूल्य हमारे जीवन का प्रतिमान बने,
त्याग की गौरव गाथाएं बीते कल का इतिहास बनें,

प्रष्ठ न धूमिल हों, जिनको पूर्वज वीरों ने सँवारा,
उठो जवानों आज वतन की माटी ने ललकारा,
आज देश में निर्दोषों का लहू बह रहा खुलेआम,
मन में कुन्ठा पल रही क्योंकि खाली हाथों को नहीं काम,
मजदूर हाथ मलता किसान का धन मँहगाई ने खाया,
घर में ही भिखारी हक के हम,सोचो ये है कैसी माया,

इंकलाब की गूँज उठे, आराम रहे ना प्यारा,
उठो जवानो आज वतन की माटी ने ललकारा,
ये कारगिल के शहीदों की दास्ताँ सुनो,
भगत अशफाक और बिस्मिल की राह तुम चुनो,

वतन पे जान कर फिदा चले गए,
कि रखनी लाज अब तुम्हें ये कह गए,
ये उनकी याद ये निशान रह गए,
है आज कौन जो न उनकी जय कहे,

कसम है उनके लहू की निडर बनो,
ये कारगिल के शहीदों की दास्ताँ सुनो,...
एक प्रसंग याद आ रहा है- काकोरी काण्ड का मुकदमा चल रहा था,लम्बी बहस के बाद फैसले का दिन आया ।ठाकुर ऱोशनसिंह का फैसला अँग्रेज जज ने सुनाना शुरू किया।रोशनसिंह के पल्ले कुछ नहीं पड़ रहा था क्योंकि फैसला अँग्रेजी में था। वे बोले-ई जज का बकर--बकर कर रहा है। पूरे फैसले के बाद जब पता चला कि फाँसी हुई है वे बहुत खुश हुए क्योंकि बाकी साथियों अ्शफाकउल्ला,रामप्रसाद बिस्मिल आदि को फाँसी हो चुकी थी और वे पीछे नहीं रहना चाहते थे।.आजादी के इतने वर्षों बाद भी क्या हम सब देशवासी ठाकुर रोशनसिंह वाले पाले में नहीं खडे हैं क्या, जरा सोचिए-

Thursday, 30 May 2013

फरेब देती हैं इंसानियत से दूर करें,
बैल कोल्हू का बनाती हैं हमें जंज़ीरें,
जहाँ में शान्ति का,सुख का मुकाम आगे है,
आओ,दें तोड़ हम झूठी जो गढ़ी जंज़ीरें,

Sunday, 21 April 2013

जिन्दगी जीने को क्या-क्या नहीं किया हमने,
बन के शंकर कभी, जहर तलक पिया हमने,
जिन्दगी होती है,जिन्दादिली का दूसरा नाम,
खुशी का गीत, बनाया न मर्सिया हमने,