उठो अहिंसा की संस्कृति पर हिंसा के आघात हो रहे,
स्वच्छ रुपहली इस धरती पर भीषण उल्कापात हो रहे,
कहीं न बदले मूल्य हमारे जीवन का प्रतिमान बने,
त्याग की गौरव गाथाएं बीते कल का इतिहास बनें,
प्रष्ठ न धूमिल हों, जिनको पूर्वज वीरों ने सँवारा,
उठो जवानों आज वतन की माटी ने ललकारा,
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