कदम-कदम से दिल से दिल मिलाना चाहते हैं हम,
वतन में एक नया चमन खिलाना चाहते हैं हम,
कराहती जमीन है पुकारता है आसमाँ,
जिधर भी देखिए उधर धुँआ-धुँआ महज़ धुँआ,
कि भी़ड़ में रिवाज़ की या रोशनी की चौंध में,
अजब खयालों में ही गुम ये सो रहा है नौजवाँ,
सुनो कि अपना फैसला सुनाना चाहते हैं हम,
वतन में एक नया चमन खिलाना चाहते हैं हम...
वतन में एक नया चमन खिलाना चाहते हैं हम,
कराहती जमीन है पुकारता है आसमाँ,
जिधर भी देखिए उधर धुँआ-धुँआ महज़ धुँआ,
कि भी़ड़ में रिवाज़ की या रोशनी की चौंध में,
अजब खयालों में ही गुम ये सो रहा है नौजवाँ,
सुनो कि अपना फैसला सुनाना चाहते हैं हम,
वतन में एक नया चमन खिलाना चाहते हैं हम...
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