Friday, 27 September 2013

जहाँ पर आपका आभाष होगा,
वहाँ पतझार भी मधुमास होगा,

जहाँ होगी कहीं वैभव की चर्चा,
कटे हाथों का भी इतिहास होगा,

यूँ ही होता नहीं लहरों में कम्पन,
कोई प्यासा नदी के पास होगा,

जो हम लड़ते रहे भाषा को लेकर,
कोई ग़ालिब न तुलसीदास होगा,

(अंसार कम्बरी)

No comments: