Monday, 16 September 2013


खूब नारे उछाले गए,
लोग बातों में टाले गए,

जो अंधेरों में पाले गए,
दूर तक वो उजाले गए,

जिसने ज्यादा उ़ड़ाने भरीं,
उसके पर नोच डाले गए,

पाँव जितने चले उनसे भी,
दूर पांवों के छाले गए,

जिनसे घर में उजाले हुए,
वे ही घर से निकाले गए,

जिनके मन में कोई चोर था,
वो नियम से शिवाले गए,

इक जरा सी मुलाकात के,
कितने मतलब निकाले गए,

कौन साजिश में शामिल हुए,
किनके घर के निवाले गए,

अब ये ताजा अंधेरे जिय़ो,
कल के बासी उजाले गए,

(लक्ष्मीशंकर वाजपेयी)

No comments: