राजनीति की मंडी बड़ी नशीली है,
इस मंडी में सबने मदिरा पी ली है,
कमरबंद है पुख्ता सिर्फ दलालों के,
आम आदमी की तो धोती ढ़ीली है,
(रामेन्द्र त्रिपाठी)
इस मंडी में सबने मदिरा पी ली है,
कमरबंद है पुख्ता सिर्फ दलालों के,
आम आदमी की तो धोती ढ़ीली है,
(रामेन्द्र त्रिपाठी)
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