Sunday, 15 September 2013


धीरे-धीरे सुबह हुई जाग उठी जिन्दगी,

पन्छी चले,अम्बर को अम्बर को अम्बर को,
माझी चले, सागर को सागर को सागर को,
प्यार का नाम जीवन है मंज़िल है प्रीतम की गली...

(इन्दीवर)

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