हममें है क्या,जो हमें कोई हसीना चाहे,
सिर्फ जज़बात हैं जज़बात में क्या रक्खा है,
किसकी तक़दीर में हैं उनके महकते गेसू,
किसके घर फैलेगा उस मस्त नज़र का जादू,
इन परेशान सवालात में रक्खा है,
इतना दीवाना न बन अय दिले बेताब सँभल,
वो अगर मिल भी लिए तुझसे तो इतना न मचल,
बेतआल्लुक सी मुलाकात में क्या रक्खा है,
मुस्कराहट को मोहब्बत का इशारा न समझ,
मिल लिए होगे वो यूँ ही, उन्हें अपना न समझ,
ऐसे नादान खयालात में क्या रक्खा है,
(साहिर)
सिर्फ जज़बात हैं जज़बात में क्या रक्खा है,
किसकी तक़दीर में हैं उनके महकते गेसू,
किसके घर फैलेगा उस मस्त नज़र का जादू,
इन परेशान सवालात में रक्खा है,
इतना दीवाना न बन अय दिले बेताब सँभल,
वो अगर मिल भी लिए तुझसे तो इतना न मचल,
बेतआल्लुक सी मुलाकात में क्या रक्खा है,
मुस्कराहट को मोहब्बत का इशारा न समझ,
मिल लिए होगे वो यूँ ही, उन्हें अपना न समझ,
ऐसे नादान खयालात में क्या रक्खा है,
(साहिर)
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