Sunday, 15 September 2013

मुझे मिल गया बहाना तेरी दीद का,
कैसी खुशी ले के आया चाँद ईद का,

जुल्फ़ मचल के खुल-खुल जाए,
चाल में मस्ती घुल-घुल जाए,
ऐसी खुशी आज मिली,
आँखों में नाम नहीं नींद का,...

जागती आँखें ढ़ूढ़ती हैं सपने,
तुझ बिन आके पहलू में अपने,
दिल को मिली ऐसी खुशी,
आँखों में नाम नहीं नींद का,...

रोते ही तेरे चटकी हैं कलियाँ,
दिलवर बनके धड़की हैं कलियाँ,
ऐसी कटी रात मेरी,
आँखों में नाम नहीं नींद का,...

(साहिर)

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