मालिक ने हर इंसान को इंसान बनाया,
हमने उसे हिन्दू औ मुसलमान बनाया,
कुदरत ने तो बक्शी थी हमें एक ही धरती,
हमने कही भारत कहीं ईरान बनाया,
अच्छा है अभी तक तेरा कुछ नाम नहीं है,
तुझको किसी मज़हब से कोई काम नहीं है,
जिस इल्म ने इंसान को तक़्सीम किया है,
उस इल्म का तुझपे कोई इल्ज़ाम नहीं है,
तू बदले हुए वक्त की पहचान बनेगा,
इंसान की औलाद है इंसान बनेगा,
(साहिर)
हमने उसे हिन्दू औ मुसलमान बनाया,
कुदरत ने तो बक्शी थी हमें एक ही धरती,
हमने कही भारत कहीं ईरान बनाया,
अच्छा है अभी तक तेरा कुछ नाम नहीं है,
तुझको किसी मज़हब से कोई काम नहीं है,
जिस इल्म ने इंसान को तक़्सीम किया है,
उस इल्म का तुझपे कोई इल्ज़ाम नहीं है,
तू बदले हुए वक्त की पहचान बनेगा,
इंसान की औलाद है इंसान बनेगा,
(साहिर)
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