घायलों की पीड़ितों की,गूँज है वातावरण में,
एक मंदिर सा बना रणक्षेत्र,मैं इसका पुजारी,
क्रन्दनों कोलाहलों के बीच,यह आवाज भी है,
अलग सबसे प्रबल सबसे,मर्मभेदी और भारी,
(दुष्यन्त कुमार)
एक मंदिर सा बना रणक्षेत्र,मैं इसका पुजारी,
क्रन्दनों कोलाहलों के बीच,यह आवाज भी है,
अलग सबसे प्रबल सबसे,मर्मभेदी और भारी,
(दुष्यन्त कुमार)
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