क़ौम इन पर गुमान करती है,
जिन्दगी एहतराम करती है,
वक्त ढ़ोता शहीद की अर्थी,
मौत झुककर सलाम करती है,
सारा आलम मुरीद होता है,
वक्त खुद चश्मदीद होता है,
मौत पेशानी चूम लेती है,
जब सिपाही शहीद होता है,
(आत्मप्रकाश शुक्ल)
जिन्दगी एहतराम करती है,
वक्त ढ़ोता शहीद की अर्थी,
मौत झुककर सलाम करती है,
सारा आलम मुरीद होता है,
वक्त खुद चश्मदीद होता है,
मौत पेशानी चूम लेती है,
जब सिपाही शहीद होता है,
(आत्मप्रकाश शुक्ल)
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