Sunday, 15 September 2013

ईद मुबारक

अय दोस्तो, मुबारक त्योहार ये मिलन का,
चंदा की झलक बायस होती है इस जशन का,

है उससे इश्क कितना, पूछे है ये महीना,
सच में कहूँ तो ये है इक रिश्ता जानो-तन का,

वैसे तो हजारों गुल गुलजार इस चमन में,
भाते बहार को बस कुछ फूल ही गुलशन के,

आबाद रहे ये दिल, आबाद रहे बस्ती,
नेमत जहाँ है उसकी चारो तरफ बरसती,

छुट जाए रंगे-महफिल,थम जाए नब्जे-हस्ती,
मत छोड़ना वो दामन, मस्ती जहाँ है बसती,

सब ओर अमन और चैन की दुनिया बनी रहे,
पैग़ाम यही ईद का, लोगों से दिल कहे,

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