प्रेमचन्द ने कहा था --
नेकनामी और बदनामी बहुत से लोगों के हल्ला मचाने से नहीं होती,सच्ची नेकनामी मन से होती है,अगर आपका मन बोले कि मैंने जो किया वही मुझे करना चाहिए था, इसके सिवा कोई दूसरी बात करना मेरे लिए उचित नहीं था, तो वही नेकनामी है।
नेकनामी और बदनामी बहुत से लोगों के हल्ला मचाने से नहीं होती,सच्ची नेकनामी मन से होती है,अगर आपका मन बोले कि मैंने जो किया वही मुझे करना चाहिए था, इसके सिवा कोई दूसरी बात करना मेरे लिए उचित नहीं था, तो वही नेकनामी है।
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