Friday, 27 September 2013


घर के बाहर लगाया पेड़,एक पिलखन का,
काम अच्छा हुआ ये आज, हमारे मन का,

छाया देगा घनी, बाहर से जब घर आएँगे,
सोच में दिन है वो, सच में बड़ा सुख पाएँगे,

हम रहेंगे नहीं, पर जब तलक ये वृक्ष जिया,
कहेगा पथिक से, हमने धरा से प्यार किया,

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