रोज न पीने की ये सज़ा है,
कल पी ली थी आज नशा है,
गलियों-गलियों नाम लिखा है,
बदनामी का अपना मज़़ा है,
बातें करना दीवारों से,
दीवानों की खास अदा है,
बादल बिजली आँधी पानी,
कोई पहली बार हँसा है,
(रामेन्द्र त्रिपाठी)
कल पी ली थी आज नशा है,
गलियों-गलियों नाम लिखा है,
बदनामी का अपना मज़़ा है,
बातें करना दीवारों से,
दीवानों की खास अदा है,
बादल बिजली आँधी पानी,
कोई पहली बार हँसा है,
(रामेन्द्र त्रिपाठी)
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