अब नहीं हम चुप रहेंगे
.............................
चाल अब चलने न देंगे हम,
कुटिल दुशासनों को,
दाँव में शकुनी हमारे,
पाँव के नीचे पड़ेगे,
क्योंकि छल की नीति ने,
अबतक हमें नीचा दिखाया,
चूक कर अवसर,
पुराना पाठ क्यों दोहराएँगे हम,
अब नहीं हम चुप रहेंगे,
इसलिए ले आज,
अंतश्चेतना से शक्ति सारी,
वक्त ने है जो उछाला,
प्रश्न वह बढ़ कर लपक लें,
दें दिखा सामर्थ्य,
बढ़ आगे उसे अब छीन ही लें,
भीख में अधिकार ले,
कैसे भला हम जी सकेंगे,
सोचने को वक्त काफी दे चुके हैं,
किन्तु अब तो,
आज अपनी साधना का सार,
बाजी पर लगा है,
अब नहीं हम चुप रहेंगे,
अब न हम चुप रह सकेंगे..
.............................
कब तलक हम,
वक्त की रफ्तार का देखें तमाशा,
कब तलक हम शान्त हो दें,
मन अभागे को दिलासा,
आग का दरिया चुनौती दे रहा,
हमको मुकाबिल,
आज अपनी अर्चना का हार,
बाजी पर लगा है,
अब नहीं हम चुप रहेंगे
वक्त की रफ्तार का देखें तमाशा,
कब तलक हम शान्त हो दें,
मन अभागे को दिलासा,
आग का दरिया चुनौती दे रहा,
हमको मुकाबिल,
आज अपनी अर्चना का हार,
बाजी पर लगा है,
अब नहीं हम चुप रहेंगे
प्रश्न इसका है नहीं,
हम आज हारें या कि जीतें,
प्रश्न इसका भी नहीं,
हम मान पाने को झगड़ लें,
प्रश्न है इंसानियत की बलि चढ़े,
हम मूक बैठे,
आज अपनी चेतना का ज्वार,
बाजी पर लगा है,
अब नहीं हम चुप रहेंगे,
दाँव में शकुनी हमारे,
पाँव के नीचे पड़ेगे,
क्योंकि छल की नीति ने,
अबतक हमें नीचा दिखाया,
चूक कर अवसर,
पुराना पाठ क्यों दोहराएँगे हम,
अब नहीं हम चुप रहेंगे,
इसलिए ले आज,
अंतश्चेतना से शक्ति सारी,
वक्त ने है जो उछाला,
प्रश्न वह बढ़ कर लपक लें,
दें दिखा सामर्थ्य,
बढ़ आगे उसे अब छीन ही लें,
भीख में अधिकार ले,
कैसे भला हम जी सकेंगे,
सोचने को वक्त काफी दे चुके हैं,
किन्तु अब तो,
आज अपनी साधना का सार,
बाजी पर लगा है,
अब नहीं हम चुप रहेंगे,
अब न हम चुप रह सकेंगे..
No comments:
Post a Comment