जिसने मुझे सुकून दिलाया तमाम उम्र,
शायद वो था रक़ीब मेरा चारागर न था,
घटना रहा वजूद न अफसाना कि मुझमें,
खुद्दारियों का खून करे, वो हुनर न था,
शायद वो था रक़ीब मेरा चारागर न था,
घटना रहा वजूद न अफसाना कि मुझमें,
खुद्दारियों का खून करे, वो हुनर न था,
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