Friday, 27 September 2013

मेरे घर आयी एक नन्ही परी
चाँदनी के हसीन रथ पे सवार

उसकी बातों में शहद जैसी मिठास,
उसकी सांसों में इतर की महकार,
होंठ जैसे कि भीगे-भीगे गुलाब,
गाल जैसे कि दहके-दहके अनार,

मेरे घर आयी एक नन्ही परी
चाँदनी के हसीन रथ पे सवार

उस के आने से मेरे आँगन में
खिल उठे फूल, गुनगुनायी बहार
देख कर उस को जी नहीं भरता
चाहे देखूँ उसे हजार बार

मेरे घर आयी एक नन्ही परी
चाँदनी के हसीन रथ पे सवार

मैंने पूछा उसे के कौन हैं तू
हँस के बोली के मैं हूँ तेरा प्यार
मैं तेरे दिल में थी हमेशा से
घर में आयी हूँ, आज पहली बार

मेरे घर आयी एक नन्ही परी
चाँदनी के हसीन रथ पे सवार

(साहिर)

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