अपने अन्दर जरा झाँक मेरे वतन,
अपने ऐबों को मत ढ़ाँक मेरे वतन,...
रंग औ नस्ल के दायरे से निकल,
गिर चुका है बहुत देर,अब तो सँभल,
तेरे दिल से जो नफरत न मिट पाएगी,
तेरे घर फिर गुलामी पलट आएगी,
अपनी बरबादियों का तुझे वास्ता,
ढ़ूँढ़ अपने लिए अब नया रास्ता,
अपने अन्दर जरा झाँक मेरे वतन,
अपने ऐबों को मत ढ़ाँक मेरे वतन,
अपने ऐबों को मत ढ़ाँक मेरे वतन,...
रंग औ नस्ल के दायरे से निकल,
गिर चुका है बहुत देर,अब तो सँभल,
तेरे दिल से जो नफरत न मिट पाएगी,
तेरे घर फिर गुलामी पलट आएगी,
अपनी बरबादियों का तुझे वास्ता,
ढ़ूँढ़ अपने लिए अब नया रास्ता,
अपने अन्दर जरा झाँक मेरे वतन,
अपने ऐबों को मत ढ़ाँक मेरे वतन,
No comments:
Post a Comment