प्रेमचन्द ने कहा था --
दोस्त की तलाश सबको होती है,नए लिखने वाले को खासकर और दोस्त ही उसे नहीं मिलता।
मिलते हैं कौन ,अपने से छोटे कातर विलगित प्रशंसक या अपने से बड़े रक्तचक्षु, मौनव्रती ,जलद गम्भीर दिग्गज महारथी...
दोस्त की तलाश सबको होती है,नए लिखने वाले को खासकर और दोस्त ही उसे नहीं मिलता।
मिलते हैं कौन ,अपने से छोटे कातर विलगित प्रशंसक या अपने से बड़े रक्तचक्षु, मौनव्रती ,जलद गम्भीर दिग्गज महारथी...
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