Sunday, 15 September 2013

प्रेमचन्द ने कहा था --

दोस्त की तलाश सबको होती है,नए लिखने वाले को खासकर और दोस्त ही उसे नहीं मिलता।
मिलते हैं कौन ,अपने से छोटे कातर विलगित प्रशंसक या अपने से बड़े रक्तचक्षु, मौनव्रती ,जलद गम्भीर दिग्गज महारथी...

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