जीवन रंगभूमि है,जिसमें हम सब अपनी छोटी सी भूमिका खेलने आए हैं।दर्शकों से हरदम हर्ष ध्वनि की अपेक्षा क्यों, वह तो जो होगा नाटक के अन्त में होगा।जीवन समर भूमि है तुम भी एक छोटे से सैनिक हो,सैनिक की दृष्टि केवल अपने समर पर होती है।वर्तमान से परांगमुख होकर कोई कालजयी नहीं हुआ।अंगीकार करो जीवन को जैसा वह तुम्हें मिला,उत्तर दो उन प्रश्नों के जो युग तुम्हारे सामने रखे हैं।प्रश्न न्याय अन्याय के,सुन्दर असुन्दर के,शेष की चिन्ता मत करो।
जिसे पदक की लालसा घेरे रहती है उसे चाहिए यहाँ से चला जाए,यहाँ तो जो कुछ मिलता है मरने के बाद।
प्रेमचन्द
जिसे पदक की लालसा घेरे रहती है उसे चाहिए यहाँ से चला जाए,यहाँ तो जो कुछ मिलता है मरने के बाद।
प्रेमचन्द
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