झेलम का पानी लाल हो रहा कहता है,
मानो अब भृकुटि तिरीछी होने वाली है,
करके प्रयास अंतिम क्षण तक समझाने का,
वंशी कोई अंगार उगलने वाली है,
इसलिए समय की गति को जानो-पहचानो,
यह नहीं हमारा प्रश्न,वरन है इस युग का,
यमुना के जल को जहरीला करने वालो,
बालक के होंगे पैर और सिर वासुकि का,
मानो अब भृकुटि तिरीछी होने वाली है,
करके प्रयास अंतिम क्षण तक समझाने का,
वंशी कोई अंगार उगलने वाली है,
इसलिए समय की गति को जानो-पहचानो,
यह नहीं हमारा प्रश्न,वरन है इस युग का,
यमुना के जल को जहरीला करने वालो,
बालक के होंगे पैर और सिर वासुकि का,
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