बहुत ही तल्ख है मेरी जुबान ये सच है,
मैं साफ गो हूँ बहुत मेहरवान ये सच है,
भरम भले हो कि धरती से मिल रहा है गले,
झुका नहीं है कहीं आसमान, ये सच है,
जोश था, पंख थे, मौसम भी ठीक था लेकिन,
ख्वाब ही रह गई मेरी उड़ान, ये सच है,
(संजय मासूम)
मैं साफ गो हूँ बहुत मेहरवान ये सच है,
भरम भले हो कि धरती से मिल रहा है गले,
झुका नहीं है कहीं आसमान, ये सच है,
जोश था, पंख थे, मौसम भी ठीक था लेकिन,
ख्वाब ही रह गई मेरी उड़ान, ये सच है,
(संजय मासूम)
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