आज घूमने गए सभी हम
छोड़ के अपनी बस्ती,
पैसे खर्चो नहीं मिलेगी
मिली ये खुशियाँ सस्ती,
छोड़ किताबों की बंदिश से,
देखी बाहर दुनिया,
आई जो फुर्ती चुस्ती तो,
बस में कर ली मस्ती,
इस मस्ती में झूम रहे,
हम कितने लायक हैं
छोड़ के अपनी बस्ती,
पैसे खर्चो नहीं मिलेगी
मिली ये खुशियाँ सस्ती,
छोड़ किताबों की बंदिश से,
देखी बाहर दुनिया,
आई जो फुर्ती चुस्ती तो,
बस में कर ली मस्ती,
इस मस्ती में झूम रहे,
हम कितने लायक हैं
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