नन्ही लहर तेज लहरा कर, सागर हलचल से भर दे,
एक फूल खिल कर गुलशन का,जर्रा-जर्रा खुश कर दे,
दीप अँधेरे के सीने का पर्वत चीरे कहे यही,
एक फूल खिल कर गुलशन का,जर्रा-जर्रा खुश कर दे,
दीप अँधेरे के सीने का पर्वत चीरे कहे यही,
नन्हा झरना बोले -मेरा हक़ है इसे इधर धर दे,