Sunday, 6 July 2014

कई दिनों के बाद है आया छुट्टी वाला दिन
कितना मेरे मन को भाया छुट्टी वाला दिन

आज नहीं उठना है जल्दी सोएँगे जी भर हम
ले जाओ क्या कर लेंगें ये चाय भला पीकर हम

हफ्ते भर जब खटे तो पाया  छुट्टी वाला दिन
कई दिनों के बाद है आया छुट्टी वाला दिन

क्यों टेँशन हो आज नहीं स्कूल हमें जाना
नही टोकना काम करेँगे हम तो मनमाना

कितनी सारी खुशियाँ लाया छुट्टी वाला दिन
कई दिनो के बाद है आया छुट्टी वीला दिन

जब भी हो रूटीन जिन्दगी सहा नहीं जाता
लगता एक मशीन जिन्दगी मजा नहीं आता

परिवर्तन ले करके आया छुट्टी वाला दिन
कई दिनो के बाद है आया छुट्टी वाला दिन

Thursday, 3 July 2014

प्रेम पथ पर चल पड़ा ये दिल सदा पागल रहा
हादसों की धूप में साया बना बादल रहा
जो मिला अब तक मिलेगा और भी वो इसलिये
मेरे अरमानों पे तेरे प्यार का आँचल रहा

खत्म हुई गर्मी की छुट्टी फिर स्कूल खुले
बहुत दिनों के बाद यार खुशियों के फूल खिले

खाली बैठे-बैठे अपना जी उकताया था
टी वी कम्प्यूटर गर्मी में रास न आया था

जी करता था वर्षा हो शाखोँ के पात धुले

होमवर्क भी खत्म हुआ नानी के घर फेरा
खरबूजा तरबूज आम का उखड़ गया डेरा

मन था किसे सुनाएँ किस्से साथी खूब मिले

फिर से भर नूतन उमंग में पढने जाएँगें
सीखेंगे समझेँगे अपना ज्ञान बढाएँगे

बिगडे काम बना करते आपस में हिले मिले

पढने लिखने से जीवन में अंतर आता है
सही गलत का भेद ये मन बेहतर कर पाता है

मिले हवा ये तभी कि जब पंखे की पवन डुले
खत्म हुई गर्मी की छुट्टी फिर स्कूल खुले