Sunday, 24 August 2014

उठ जाओ अब सुबह हुई ,
तुम आँखें तो खोलो,

चिड़ियाँ बोलीं मिसरी जैसी,
बोली तुम बोलो,

खुली हवा में टहलो घूमो,
मन क्यों सुस्त रहे,

थोड़ा योग करो, दोडो,तो,
तन भी चुस्त रहे,

सूरज निकले उससे पहले,
उठो नहा लोगे,

सारा दिन हँसते बीतेगा,
खुशियां पा लोगे,

अपना काम करो खुद सारा,
अच्छे बन जाओ,

प्यार करें सब तुमको,ऐसे,
बच्चे बन जाओ,

Sunday, 10 August 2014

लो ये दिन भी बीत गया,

यादोँ में रह जाने को,
कभी न वापस आने को,
लुटते हुए खजाने को,

भरा या हमने, रीत गया,
पर ये दिन भी बीत गया,

अपना या बेगाना था,
चमन या कि वीराना था,
सच्चा या अफसाना था,

जो भी रहा,व्यतीत गया,
हाँ,ये दिन भी बीत गया,

अब उसमें अपना क्या है,
समझो तो सपना सा है,
मन दे रहा दिलासा है,

दुश्मन था या मीत गया,
जो भी हो पर बीत गया,

था अपना पर भूत हुआ,
ज्यों गहरा हो एक कुँआ,
खेला हमने एक जुआ,

हार गया या जीत गया,
पर ये दिन भी बीत गया,

अब न कभी आएँ वो पल,
कल तो बस होता है कल,
बस उसका मिलता है फल,

खट्टा था या स्वीट गया,
हाँ ये दिन भी बीत गया,

पल प्रतिपल पय सम पी लें,
साँसों की सरगम सी लें,
जरा-जरा जीवन जी लें,

बीत गया सो बीत गया,
बीत गया सो बीत गया,

मेरे भइया मेरे चन्दा मेरे अनमोल रतन,
तेरे बदले में जमाने की कोई चीज न लूँ,

तेरी साँसों की कसम खा के हवा चलती है,
तेरे चेहरे की झलक पा के बहार आती है,

एक पल भी मेरी नज़रों से जो तू ओझल हो,
हर तरफ मेरी नज़र तुझको पुकार आती है,

मेरे भइया मेरे चन्दा मेरे....

तेरे चेहरे की महकती हुई लडियों के लिए,
अनगिनत फूल उम्मीदों के चुने हैं मैने,

वो भी दिन आये कि इन ख्वाबों को ताबीर मिले,
तेरी खातिर जो हसीं ख्वाब बुने हैं मैंने,

मेरे भइया मेरे चंदा मेरे अनमोल रतन,
तेरे बदले में जमाने की कोई चीज न लूँ,त