लो ये दिन भी बीत गया,
यादोँ में रह जाने को,
कभी न वापस आने को,
लुटते हुए खजाने को,
भरा या हमने, रीत गया,
पर ये दिन भी बीत गया,
अपना या बेगाना था,
चमन या कि वीराना था,
सच्चा या अफसाना था,
जो भी रहा,व्यतीत गया,
हाँ,ये दिन भी बीत गया,
अब उसमें अपना क्या है,
समझो तो सपना सा है,
मन दे रहा दिलासा है,
दुश्मन था या मीत गया,
जो भी हो पर बीत गया,
था अपना पर भूत हुआ,
ज्यों गहरा हो एक कुँआ,
खेला हमने एक जुआ,
हार गया या जीत गया,
पर ये दिन भी बीत गया,
अब न कभी आएँ वो पल,
कल तो बस होता है कल,
बस उसका मिलता है फल,
खट्टा था या स्वीट गया,
हाँ ये दिन भी बीत गया,
पल प्रतिपल पय सम पी लें,
साँसों की सरगम सी लें,
जरा-जरा जीवन जी लें,
बीत गया सो बीत गया,
बीत गया सो बीत गया,
यादोँ में रह जाने को,
कभी न वापस आने को,
लुटते हुए खजाने को,
भरा या हमने, रीत गया,
पर ये दिन भी बीत गया,
अपना या बेगाना था,
चमन या कि वीराना था,
सच्चा या अफसाना था,
जो भी रहा,व्यतीत गया,
हाँ,ये दिन भी बीत गया,
अब उसमें अपना क्या है,
समझो तो सपना सा है,
मन दे रहा दिलासा है,
दुश्मन था या मीत गया,
जो भी हो पर बीत गया,
था अपना पर भूत हुआ,
ज्यों गहरा हो एक कुँआ,
खेला हमने एक जुआ,
हार गया या जीत गया,
पर ये दिन भी बीत गया,
अब न कभी आएँ वो पल,
कल तो बस होता है कल,
बस उसका मिलता है फल,
खट्टा था या स्वीट गया,
हाँ ये दिन भी बीत गया,
पल प्रतिपल पय सम पी लें,
साँसों की सरगम सी लें,
जरा-जरा जीवन जी लें,
बीत गया सो बीत गया,
बीत गया सो बीत गया,
No comments:
Post a Comment