पुर असरार सुंदर ग़ज़ल की तरह,
तुमको पाया है पूजा के फल की तरह,
तुमको पाया है पूजा के फल की तरह,
यूँ मिले दिल को हर एक खुशी मिल गई
जीस्त के उलझे प्रश्नों के हल की तरह,
जीस्त के उलझे प्रश्नों के हल की तरह,
मन की धरती तरसती हुई सीप थी,
तुम मिले स्वाति की बूँद जल की तरह,
तुम मिले स्वाति की बूँद जल की तरह,
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