Saturday, 14 October 2017

खुशियाँ कहतीं हैं ?
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जीवन के पत्तों पर
बूँदों सी हम,
सोचो तो ज्यादा हैं
तोलो तो कम,
खुशियाँ इन बूँदों सी,
बरसे हर दम,
हम पर है ले पाएँ
ज्यादा या कम,
नीलकण्ठ ट्रेकिंग अभियान
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मौसम भी हुआ भीगा,
रुत पे भी जवानी है,
है आग कोई अन्दर,
बाहर से ये पानी है,
औरों की तो छोड़ो,
हैं पेड़ भी बौराए,
कुदरत की हर शय की
ये ही तो कहानी है,
नीलकण्ठ ट्रेकिंग अभियान
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नीलकण्ठ जो है अखण्ड,
ऊँची-नीची राह,
क्या वाह वाह,
सब एक रंग,
हों संग-संग,
हम क्या करेंगे,
बोलो क्या करेंगे,
मज़े करेंगे,मज़े करेंगे,मज़े करेंगे,
मज़े करेंगे,मज़े करेंगे,मज़े करेंगे,
नीलकण्ठ ट्रेकिंग अभियान
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ऊँचे नीचे रस्ते होइंगे,
चल-चल हालत खस्ते होइंगे,
भूलभुलैया हो जाएँगे,
भटके तो हम खो जाइंगे,
क्या करेंगे,
बोलो क्या करेंगे,
संग चलेंगे संग चलेंगे संग चलेंगे
संग चलेंगे संग चलेंगे संग चलेंगे,
पत्तों पर ठहरी-ठहरी
ये बारिश की बूँदें,
सोचें हम ये हैं
गालों पर आँखों को मूदें,
बंद करे पलकों को
पल-पल जीवन को जी लें,
मदिर-मदिर मन से साँसों की
मदिरा को पीलें,
क्या अच्छा है और बुरा
कहते किसको भूलें,
आज उम्मीदों के झूले चढ़
अम्बर को छू लें,
जीवन के रास्तों में
चलना है रुक के थम के,
खुशियों के फूल होंगे,
काँटे भी होंगे ग़म के,
आराम से दोनों से
हमको निबाह करना,
चलना उसूल पर ही,
जीना हो चाहे मरना,
खेल अब होने वाला है
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हल्ला गुल्ला शोर मचाएं,
आउट कर जल्दी भग जाएं,
जाएं तो पकड़े ना जाएं,
गया सामने बुना एक,
मकड़ी सा जाला है,
खेल अब होने वाला है,
छूकर भागें, साँस न टूटें,
एक साथ मिलकर सब छूटें,
जरा देर में यहाँ पे या कोई,
हँसने वाला है,
या कि फिर रोने वाला है,
खेल अब होने वाला है,