आज ग़र साथ ज़माना न दे ,तो ग़म क्यों हो,
दिल को धड़काएं ऐसे गीत तो बन सकता हूं,
ज़ेहन में तैरती तस्वीर सुहाने कल की,
कर नहीं पूरी सका,नींव तो बन सकता हूं,
दिल को धड़काएं ऐसे गीत तो बन सकता हूं,
ज़ेहन में तैरती तस्वीर सुहाने कल की,
कर नहीं पूरी सका,नींव तो बन सकता हूं,
1 comment:
आप के मुक्तक अच्छे लगे । यदि पहली दूसरी और चौथी पंक्ति में तुक मिले तो बेहतर
होगा । मेरी बधाई लीजिए ।
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