मित्रो,( सुन्दर रात्रिगीत)
फैली हुई हैं सपनों की बाहें, आजा चल दें कहीं दूर,
वही मेरी मंज़िल वही तेरी राहें,आजा चल दें कहीं दूर,
ऊदी घटा के साए तले छिप जाएँ,धुँधली फिज़ा में,कुछ खोएँ,कुछ पाएँ-2
साँसों की लय पर,कोई ऐसी धुन गाएँ,दे दे जो दिल को दिल की पनाहें,
आजा चल दें कहीं दूर,
फैली हुई हैं सपनों की बाहें आजा चल दें कहीं दूर,
वही मेरी मंज़िल वही तेरी राहें,आजा चल दें कहीं दूर,
झूला धनक का ,धीरे-धीरे हम झूलें,अंबर तो क्या है तारों के भी लब छूलें,-2
मस्ती में झूमें,और कभी हम घूमें,देखें न पीछे मुड़के निगाहें,
आजा चल दें कहीं दूर,
फैली हुई हैं सपनों की बाहें, आजा चल दें कहीं दूर,
वही मेरी मंज़िल वही तेरी राहें,आजा चल दें कहीं दूर,
(साहिर)
फैली हुई हैं सपनों की बाहें, आजा चल दें कहीं दूर,
वही मेरी मंज़िल वही तेरी राहें,आजा चल दें कहीं दूर,
ऊदी घटा के साए तले छिप जाएँ,धुँधली फिज़ा में,कुछ खोएँ,कुछ पाएँ-2
साँसों की लय पर,कोई ऐसी धुन गाएँ,दे दे जो दिल को दिल की पनाहें,
आजा चल दें कहीं दूर,
फैली हुई हैं सपनों की बाहें आजा चल दें कहीं दूर,
वही मेरी मंज़िल वही तेरी राहें,आजा चल दें कहीं दूर,
झूला धनक का ,धीरे-धीरे हम झूलें,अंबर तो क्या है तारों के भी लब छूलें,-2
मस्ती में झूमें,और कभी हम घूमें,देखें न पीछे मुड़के निगाहें,
आजा चल दें कहीं दूर,
फैली हुई हैं सपनों की बाहें, आजा चल दें कहीं दूर,
वही मेरी मंज़िल वही तेरी राहें,आजा चल दें कहीं दूर,
(साहिर)
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