Wednesday, 26 February 2014

चला उसमे रवानी है, रूका पानी तो सड़ता है,
पराजित जिंदगी वाली, कहानी कौन पढ़ता है,

सफर में अनगिनत राही, अलग मंजिल अलग रस्ते,
कभी काँटे भी मिलते हैं, कभी फूलों के गुलदस्ते,
है अपना लक्ष्य क्या, इस वक्ष में उसको बसा ले तू,
जो धुन है जीत की,उस गीत को बस गुनगुना ले तू,

हो जिसमें आग बढ़ने की,वही तो आगे बढ़ता है,
पराजित जिंदगी वाली, कहानी कौन पढ़ता है,

जवानी नाम है सैलाब का,  तूफान का,  सुन लो,
निशानी लो समझ रस्ता,नए अभियान का चुन लो,
पुरानी बात सारी भूल जा, जो है अभी वो है,
नहीं कुछ मिल सकेगा,पास तेरे है अभी, वो है,

जो हिम्मत को बना सीढ़ी चढ़े, वो आगे चढ़ता है,
पराजित जिंदगी वाली, कहानी कौन पढ़ता है,

समय ये सोचने का है नहीं, कल इसको देखेंगे,
जमा हो जाएगा कूड़ा,तो फिर किस-किस को फेकेंगे,
ये दिन हैं आजममाइश के,जो करना है अभी कर लो,
ये दामन फूल काँटों से, जो भरना है, अभी भर लो,

ये हरदम याद रक्खो, जीतता वो ही,जो लड़ता है,
पराजित जिंदगी वाली, कहानी कौन पढ़ता है,




No comments: