खूब झमाझम बारिश आयी,मौसम हुआ सुहाना,
घर पर बैठ पकौड़े खाओ,आज कहीं मत जाना,
नहा रहीं पेड़ों की पत्ती, खूबसूरत लगती हैं,
टपक रही पत्तों से बूँदें, झरने सी झरतीं हैं,
छत के नीचे दुबके बैठे, घरवाले, पशु-पक्षी,
शरण यहाँ सबने ले रखी, बच्चे हों या बच्ची,
बारिश में निकलूँ,भीगूँ मैं ऐसा सोच रहा हूँ,
तन से थोड़ा लेकिन मन से पूरा भीग रहा हूँ,
बूँदें तन को सिहरातीं तो मन भी खुश हो जाता,
कभी सोचता आखिर हमने अपनाया क्यों छाता,
कदम रोक कहता मन मुझसे,दुनियादारी सीखूँ,
पागल मन बावरा सोचता, मैं बारिश में भीगूँ,
घर पर बैठ पकौड़े खाओ,आज कहीं मत जाना,
नहा रहीं पेड़ों की पत्ती, खूबसूरत लगती हैं,
टपक रही पत्तों से बूँदें, झरने सी झरतीं हैं,
छत के नीचे दुबके बैठे, घरवाले, पशु-पक्षी,
शरण यहाँ सबने ले रखी, बच्चे हों या बच्ची,
बारिश में निकलूँ,भीगूँ मैं ऐसा सोच रहा हूँ,
तन से थोड़ा लेकिन मन से पूरा भीग रहा हूँ,
बूँदें तन को सिहरातीं तो मन भी खुश हो जाता,
कभी सोचता आखिर हमने अपनाया क्यों छाता,
कदम रोक कहता मन मुझसे,दुनियादारी सीखूँ,
पागल मन बावरा सोचता, मैं बारिश में भीगूँ,
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