Friday, 20 March 2015

ये वतन तेरी मेरी नस्ल की जागीर नहीं,
सैकड़ों नस्लों की मेहनत ने संवारा है इसे,
..पटरियां रेल की, सडकों की बसें, फोन के तार,
तेरी और मेरी खताओं की सजा क्यों भुगतें,
उनपे क्यों जुल्म हो जिनकी कोई तकसीर नहीं,
ये वतन तेरी मेरी नस्ल की जागीर नहीं,
सैकडों नस्लों की मेहनत ने सँवारा है इसे,
साहिर
तकसीर - दोष

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