Friday, 8 March 2019

मन की आँखों वाले

मन की आँखों वाले
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आओ खेलें खेल निराले,
दूर हटाएं मन के जाले,
पीड़ा महसूसें हम उनकी,
जो हैं मन की आँखों वाले,
किसी वजह से हाथ न जिनके,
पैर नहीं या आँख न जिनके,
उन पर हँसें नहीं, ये सोचें,
अगर कहीं हम ऐसे होते,
कोई हँसता कैसा लगता,
मन में जलता तीर सा लगता,
उसकी पीड़ा को अपना लें,
आओ खेलें खेल निराले,

1 comment:

नीलम राकेश said...

सुंदर शब्दों में बच्चों के अंदर मनोरंजन के साथ संस्कार जगाती रचना .