Friday, 8 November 2013


तुम न जाने किस जहाँ में खो गए,
हम भरी दुनियाँ में तन्हा हो गए,

मौत भी आती नहीं,आस भी जाती नहीं,
दिल को ये क्या हो गया,कोई शय भाती नहीं,

लूटकर मेरा जहाँ छुप गए हो तुम कहाँ,
तुम कहाँ,तुम कहाँ,तुम कहाँ,

तुम न जाने किस जहाँ में खो गए,
हम भरी दुनियाँ में तन्हा हो गए,

एक जाँ और लाख ग़म,घुट के रह जाए न दम,
आओ तुमको देख लें डूबती नज़रों से हम,

लूटकर मेरा जहाँ छुप गए हो तुम कहाँ,
तुम कहाँ,तुम कहाँ,तुम कहाँ,

तुम न जाने किस जहाँ में खो गए,
हम भरी दुनियाँ में तन्हा हो गए,
हो के मायूस तेरे दर से सवाली न गया,
झोलियाँ भर गईं सबकी,कोई खाली न गया,

तेरे दरबार में जो भी, परेशां हो के आए,
दुआएँ दे के जाए और मुरादें ले के जाए,

तू रहमत का फरिश्ता है,तू उजड़े घर बसाए,
तू रूहों का मसीहा है, तू हर ग़म को मिटाए,

अहले-दिल अहले-मोहब्बत पे इनायत है तेरी,
तूने डूबों को उबारा है, ये शोहरत है तेरी,

अनोखी शान तेरी, निराली आन तेरी,
तू मस्ती का खज़ाना,तेरा हर दिल दीवाना,

तू महबूबे-ख़ुदा है, तू हर ग़म की दवा है,
तभी तो सब कहते है,कहते है,कहते है,

हो के मायूस तेरे दर से, सवाली न गया,
झोलियाँ भर गईं सबकी,कोई खाली न गया,

जमाले-यार देखा है,जमाले-यार देखा,
रुखे-दिलदार देखा है,रुखे-दिलदार देखा,

किसी का नाज़नी जलबा सरे-दरबार देखा,
तमन्नाओं के सहरा में, हसीं-गुलजार देखा,

जब से देखा है तुझे,दिल का अजब आलम है,
जानो-ईमा भी अगर नज़र करूँ, तो कम है,

था जो सुनने में आया, तुझे वैसा ही पाया,
तू अरमानों का साहिल,तू उम्मीदों की मंज़िल,

तू हर बिगड़ी बनाए, तू बिछड़ों को मिलाए,
तभी तो सब कहते हैं,कहते हैं,कहते हैं,

हो के मायूस तेरे दर से, सवाली न गया,
झोलियाँ भर गईं सबकी,कोई खाली न गया
तोरा मनवा क्यों घबराए रे,
लाखों दीन दुखियारे प्रानी,जग में मुक्ति पाएँ रे,
राम जी के द्वार रे,

बन्द हुआ ये द्वार कभी ना,
जुग कितने ही-2 बीते,
सब द्वारों पर हारने वाले,
इस द्वारे पर-2 जीते,
लाखों पतित लाखों पतिताएँ,
पावन होकर आए रे,
रामजी के द्वार से,

तोरा मनवा क्यों घबराए रे,
लाखों दीन दुखियारे प्रानी,जग में मुक्ति पाएँ रे,
राम जी के द्वार रे,

हम मूरख जो काज बिगारें,
राम वे काज सँवारें,
वो महानंदा हो कि अहल्या,
सबको पार उतारें,
जो कंकर चरनों को छूले-2,
वो हीरा हो जाए रे,
राम जी के द्वार से,

तोरा मनवा क्यों घबराए रे,
लाखों दीन दुखियारे प्रानी,जग में मुक्ति पाएँ रे,
राम जी के द्वार रे,
आज की रात पिया दिल ना तोड़ो,
मन की बात पिया मान लो,

दिल की कहानी अपनी जुबानी,तुमको सुनाने आई हूँ,
आँखों में ले के सपने सुहाने,अपना बनाने आई हूँ,
छोड़ के साथ पिया मुख न मोड़ो,
मन की बात पिया मान लो,

आज की रात पिया दिल ना तोड़ो,
मन की बात पिया मान लो,

चन्दा भी देखें,तारे भी देखें,हमको गगन की ओट से,
घायल किया है,दिल तूने मेरा,मीठी नज़र की चोट से,
थाम के हाथ पिया.यूँ ना छोड़ो..
मन की बात पिया मान लो,

आज की रात पिया दिल ना तोड़ो,
मन की बात पिया मान लो,
हम और तुम,
तुम और हम,
खुश हैं यूँ आज मिलके,
जैसे किसी संगम पर,
मिल जाएँ दो नदियाँ,
तन्हा बहते-बहते,
मुड़ के क्यों देखे पीछे चाहे कुछ भी हो,
चलते ही जाएं नई मंज़िलो को,
रस्ते आसां है नहीं आज हम दो,
तू मेरी बाँहों में,मैं तेरी बाँहों में,
लहराएँ बाँहों में,
हम और तुम,
तुम और हम,
खुश हैं यूँ आज मिलके,
ज़ुल्फों को खुलने दो,
साँसों को घुलने दो,
दिल से दिल मिलने दो,
दीवाने हो जाएँ,
कोहरे में खो जाएँ,
मिलकर यूँ हो जाएँ,
जैसे किसी पर्वत पर,
मिल जाएँ दो बादल,
तन्हा उड़ते-उड़ते,
हम और तुम,
तुम और हम,
खुश हैं यूँ आज मिल के,
तेरी है जमीं तेरा आसमाँ,तू बड़ा मेहरबाँ,तू बख्शीश कर,
सभी का है तू सभी तेरे, खुदा मेरे तू बख्शीश कर,

तेरी मर्जी पे ऐ मालिक, हम इस दुनिया में आए हैं,
तेरी रहमत से हम सबने, ये जिस्म और जान पाए हैं,

तू अपनी नज़र हम पर रखना, किस हाल में हैं ये खबर रखना,
तेरी है जमीं तेरा आसमाँ, तू बड़ा मेहरबाँ,तू बख्शीश कर,

तू चाहे तो हमें रक्खे, तू चाहे तो हमें मारे,
तेरे आगे झुका के सर ,खड़े हैं आज हम सारे,

सबसे बड़ी ताकत वाले, तू चाहे तो हर आफत टाले,
तेरी है जमीं तेरा आसमाँ,तू बड़ा मेहरबाँ,तू बख्शीश कर,
ये रात ये चाँदनी फिर कहाँ,
सुन जा दिल की दास्ताँ,

पेड़ों की शाखों पे सोई-सोई चाँदनी,
तेरे खयालों में खोई-खोई चाँदनी,
और थोड़ी देर में थक के लौट जाएगी,
रात ये बहार की फिर कभी न आएगी,

दो एक पल और है ये समाँ,
सुन जा दिल की दास्ताँ,

लहरों के होठों पे धीमा-धीमा राग है,
भीगी हवाओं में ठन्ड़ी-ठन्ड़ी आग है,
इस हसीन आग में,तू भी जल के देख ले,
जिन्दगी के गीत की धुन बदल के देख ले,

खुलने दे अब धड़कनों की जवाँ,
सुन जा दिल की दास्ताँ,

जाती बहारें हैं उठती जवानियाँ,
तारों की छाँव में कह ले कहानियाँ,
एक बार चल दिए ग़र तुझे पुकार के,
लौटकर न आएँगे काफिले बहार के,

आजा अभी जिन्दगी है जवाँ,
सुन जा दिल की दास्ताँ,