Friday, 8 November 2013

ये रात ये चाँदनी फिर कहाँ,
सुन जा दिल की दास्ताँ,

पेड़ों की शाखों पे सोई-सोई चाँदनी,
तेरे खयालों में खोई-खोई चाँदनी,
और थोड़ी देर में थक के लौट जाएगी,
रात ये बहार की फिर कभी न आएगी,

दो एक पल और है ये समाँ,
सुन जा दिल की दास्ताँ,

लहरों के होठों पे धीमा-धीमा राग है,
भीगी हवाओं में ठन्ड़ी-ठन्ड़ी आग है,
इस हसीन आग में,तू भी जल के देख ले,
जिन्दगी के गीत की धुन बदल के देख ले,

खुलने दे अब धड़कनों की जवाँ,
सुन जा दिल की दास्ताँ,

जाती बहारें हैं उठती जवानियाँ,
तारों की छाँव में कह ले कहानियाँ,
एक बार चल दिए ग़र तुझे पुकार के,
लौटकर न आएँगे काफिले बहार के,

आजा अभी जिन्दगी है जवाँ,
सुन जा दिल की दास्ताँ,

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