प्यार पर वश तो नहीं है मेरा,लेकिन फिर भी,
तू बता दे कि तुझे प्यार करुँ या न करुँ,
तूने खुद अपने तबस्सुम से जगाया है जिन्हें,
उन तमन्नाओं का इज़हार करुँ या न करुँ,
तू किसी और के दामन की कली है लेकिन,
मेरी रातें तेरी खुश्बू से बसी रहतीं हैं,
तू कहीं भी हो तेरे फूल से आरिज़ की कसम,
तेरी पलकें मेरी पलकों पे झुकी रहतीं हैं,
मेरे ख्वाबों के झरोखों को सजाने वाली,
तेरे ख़्वाबों में कहीं मेरा गुजर है कि नहीं,
पूछकर अपनी निगाहों से बता दे मुझको,
मेरी रातों के मुकद्दर में सहर है कि नहीं...
(साहिर) तबस्सुम-मुस्कराहट,आरिज़-गाल,
तू बता दे कि तुझे प्यार करुँ या न करुँ,
तूने खुद अपने तबस्सुम से जगाया है जिन्हें,
उन तमन्नाओं का इज़हार करुँ या न करुँ,
तू किसी और के दामन की कली है लेकिन,
मेरी रातें तेरी खुश्बू से बसी रहतीं हैं,
तू कहीं भी हो तेरे फूल से आरिज़ की कसम,
तेरी पलकें मेरी पलकों पे झुकी रहतीं हैं,
मेरे ख्वाबों के झरोखों को सजाने वाली,
तेरे ख़्वाबों में कहीं मेरा गुजर है कि नहीं,
पूछकर अपनी निगाहों से बता दे मुझको,
मेरी रातों के मुकद्दर में सहर है कि नहीं...
(साहिर) तबस्सुम-मुस्कराहट,आरिज़-गाल,
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