मौत कितनी भी संगदिल हो मगर,जिन्दगी से तो मेहरबां होगी,
नित नए रंज दिल को देती है,जिन्दगी हर खुशी की दुश्मन है,
मौत सबसे निबाह करती है, जिन्दगी जिन्दगी की दुश्मन है,
कुछ न कुछ तो सुकून पाएगा,मौत के बस में जिसकी जाँ होगी,
मौत कितनी भी संगदिल हो मगर,जिन्दगी से तो मेहरबां होगी,
रंग और नस्ल नाम और दौलत,जिन्दगी कितने फर्क मानती है,
मौत हदबंदियों से ऊँची है, सारी दुनिया को एक मानती है,
जिन असूलों पे मर रहे हैं हम, उन असूलों की कद्रदाँ होगी,
मौत कितनी भी संगदिल हो मगर,जिन्दगी से तो मेहरबां होगी,
मौत से और कुछ मिले न मिले, जिन्दगी से तो जान छूटेगी,
मुस्कराहट नसीब हो कि न हो, आँसुओं की लड़ी तो टूटेगी,
हम न होंगे तो ग़म किसे होगा,खत्म हर ग़म की दास्ताँ होगी,
मौत कितनी भी संगदिल हो मगर,जिन्दगी से तो मेहरबां होगी,
नित नए रंज दिल को देती है,जिन्दगी हर खुशी की दुश्मन है,
मौत सबसे निबाह करती है, जिन्दगी जिन्दगी की दुश्मन है,
कुछ न कुछ तो सुकून पाएगा,मौत के बस में जिसकी जाँ होगी,
मौत कितनी भी संगदिल हो मगर,जिन्दगी से तो मेहरबां होगी,
रंग और नस्ल नाम और दौलत,जिन्दगी कितने फर्क मानती है,
मौत हदबंदियों से ऊँची है, सारी दुनिया को एक मानती है,
जिन असूलों पे मर रहे हैं हम, उन असूलों की कद्रदाँ होगी,
मौत कितनी भी संगदिल हो मगर,जिन्दगी से तो मेहरबां होगी,
मौत से और कुछ मिले न मिले, जिन्दगी से तो जान छूटेगी,
मुस्कराहट नसीब हो कि न हो, आँसुओं की लड़ी तो टूटेगी,
हम न होंगे तो ग़म किसे होगा,खत्म हर ग़म की दास्ताँ होगी,
मौत कितनी भी संगदिल हो मगर,जिन्दगी से तो मेहरबां होगी,
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