Wednesday, 13 November 2013

साथी हाथ बढ़ाना,साथी हाथ बढ़ाना,
एक अकेला थक जाएगा,मिलकर बोझ उठाना,
साथी हाथ बढ़ाना,

हम मेहनत वालों ने जब भी मिलकर कदम बढ़ाया,
सागर ने रस्ता छोड़ा परवत ने शीश झुकाया,

फौलादी हैं सीने अपने फौलादी हैं बाँहें,
हम चाहें तो पैदाकर दें चट्टानों में राहें,
साथी हाथ बढ़ाना,

मेहनत अपने लेख की रेखा मेहनत से क्या डरना,
कल गैरों की खातिर की आज अपनी खातिर करना,

अपना दुख भी एक है साथी,अपना सुख भी एक,
अपनी मंज़िल सच की मंज़िल अपना रस्ता नेक,
साथी हाथ बढ़ाना,

एक से एक मिले तो क़तरा बन जाता है दरिया,
एक से एक मिले तो ज़र्रा बन जाता है सहरा,

एक से एक मिले तो राई बन सकती है परवत,
एक से एक मिले तो इंसां वश में कर ले किस्मत,
साथी हाथ बढ़ाना,

माटी से हम लाल निकालें,मोती लाएं जल से,
जो कुछ इस दुनिया में बना है बना हमारे बल से,

कब तक मेहनत के पैरों में दौलत की ज़ंजीरें ?
हाथ बढ़ाकर छीन लो अपने ख्वाबों की ताबीरे,
साथी हाथ बढ़ाना,

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