Friday, 8 November 2013



जागेगा इंसान जमाना देखेगा
उट्ठेगा तूफान जमाना देखेगा,

बहता चलेगा मीलों नहरों का पानी,
झूमेगी खेती जैसे झूमें जवानी,

चमकेगा देश हमारा मेरे साथी रे
आँखों में कल का नज़ारा मेरे साथी रे,

नवयुग का वरदान ज़माना देखेगा,
जागेगा इंसान जमाना देखेगा,

फिरते थे मुल्कों-मुल्कों झोली पसारे,
अब से जिएँगे हम भी, अपने सहारे,

भरे हुए खलिहान जमाना देखेगा,
जागेगा इंसान ज़माना देखेगा,

फूटेगा मोती बनके अपना पसीना,
दुनिया की क़ौमें हमसे सीखेगी जीना,

कल का हिन्दुस्तान जमाना देखेगा,
जागेगा इंसान जमाना देखेगा,

(साहिर)

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