झर-झर झरते चंचल झरनों में तेरा संगीत,
सर सर सर सर पवन चले ये गाए तेरे गीत,
रिमझिम बरखा की बूँदों की मादक सिहरन में,
सोंधी मिट्टी की बू कसक जगाती है मन में,
मनहर गीतों की सरगम फिर दिल को पड़ी सुनाई,
फिरूँ कसकते जख़्म लिए जब चलती है पुरवाई,
चली हवा और महक वही फिर एक बार लहराई,
फिरूँ कसकते जख़्म लिए जब चलती है पुरवाई,
सर सर सर सर पवन चले ये गाए तेरे गीत,
रिमझिम बरखा की बूँदों की मादक सिहरन में,
सोंधी मिट्टी की बू कसक जगाती है मन में,
मनहर गीतों की सरगम फिर दिल को पड़ी सुनाई,
फिरूँ कसकते जख़्म लिए जब चलती है पुरवाई,
चली हवा और महक वही फिर एक बार लहराई,
फिरूँ कसकते जख़्म लिए जब चलती है पुरवाई,
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