Tuesday, 26 November 2013

बादल ढोल बजाते आए,
ढ़म्म ढ़मा ढ़म ढ़म्म,
बूँदें नाच रह पत्तों पर,
छम्म छमा छम छम्म,

पत्ते झन्डों से लहराते,
फर फर फर फर फर्र,
हवा झुलाती झूला इनको,
सर सर सर सर सर्र,

आसमान में बिजली तड़के,
तड़ तड़ तड़ तड़ तड़,
आँधी पेड़ हिला देती,
तो फल जाते हैं झड़,

टकरा बादल रस खो देते,
आपस में मत लड़,
कविता खतम हुई अब,
मुन्नी थोड़ा सा तो पढ़,

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